Thursday, July 30, 2020

प्रेरना मिसरा की कबिता

 


     " बनारस "

अपनेई रंग्ग में रंगों,
रहीसी ठाट-बाट कै संगे,
भोलोभालो और मौजमस्ती में हैगो पूरौ,
घाट - घाट पे गमछो पैंरें घूमें,
घूमत- फिरत हर मौडा लैकें हांत में गठजज्जा,
बेफिकर होकें हर रातै।


यी गेलन की जा खास बात,
ना पूछ इतै तैं जात - बिरादरी,
खाबेपीबे के सौकिया जे,
बैठ ढियांडें घाट सअर के,
करत जे देहात की बात।


केदार की पढ़कें कबिता बनारस,
मन में आई इक सौगात,
ना जानें कितैक खुबसूरत होयगौ,
बनारस कौ बो पाबन घाट,
मेला - ठेला सैर - सपाटो,
घुमंतुअन कै मनोरंजन कौ है राज,
बैठ ढियांडें घाट पे,
देखें सुंदरता की धार,
अबे हैगी सिरफ जई इक आस।

✒️ प्रेरना मिसरा
       नोएडा
(छात्तरा : दिल्ली बिस्ओबिद्यालय और हिंदी लेखका)
हिंदी सें किसानी - बुंदेली अनुबाद : सतेंद सिंघ किसान


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#अखंडबुंदेलखंडपत्तिका




महेस कटारे 'सुगम' कौ कोरोना पे बुंदेली सॉनेट - २


 कोरोना सें कठन लड़ाई हम लड़ रय हैं 
बांध मुसीका मों पै अब हम निकरे घर सें
 हिम्मत लई है बांध निकर कें ई के डर सें 
ताल ठोक कें बड़े जतन सें हम बढ़ रये हैं 
कछु दिनन खों मिलवौ जुरवौ छोड़ौ हमनें 
गरे लगावे हाथ मिलावे  सें बच रये हैं 
ई सें बचवे सबई सावधानी रच रये हैं 
दूरई रै रये खुद खों खूब सिकोड़ौ हमनें
बीमारी सें बोलौ कैसें हार मान लें
 बिना काम के कैसें चल है रोटी पानी
 डरा डरा कें तौ हो जैहै खतम कहानी 
लतया लतया मार डार हैं अगर ठान लें 
निकर परे हैं अब हम पूरी तैयारी सें
जीतेंगे हम जीतेंगे ई बीमारी सें


✒️ महेस कटारे 'सुगम'
 बीना, सागर - बुंदेलखंड
 (बुंदेली और हिंदी गजलकार)
 भासा - बुंदेली
 रचना रूप - सॉनेट


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नई सिक्छा नीती - २०२० लागू : छेत्तीय भासन में चलाए जें ई-पाठ्यक्रम....








कल्ल, २९ जून २०२० को भारत सिरकार नें नई सिक्छा नीती लागू कर दई, जीसें देस की सिक्छा - बिबस्ता में केऊ बदलाओ देखबे मिलहैं। अबसें मानओ संसादन बिकास मंतरालय खों सिक्छा मंतरालय कओ जे।

 केंदीय मानओ संसादन बिकास मंतरी रमेस पोखरियाल निसंक और सूचना पिरसारन मंतरी प्रकास जाबडेकर नें बुद्द उआर खों प्रेस - मीटिंग कर ईकी जानकारी दई।

यीसें पैलें सन १९८६ में सिक्छा नीती लागू करी गई ती।  सन १९९२ में यी नीती में कछू संसोदन करे गए ते। यानी ३४ साल बाद देस में एक नई सिक्छा नीती लागू करी जा रई।

इसरो कै पूर्ब मुखिया कस्तूरीरंगन की अध्यकच्छता में बिसेसग्यन की एक कमेटी नें ईकी रूपरेखा तज्जार करी। जिए प्रधानमंतरी नरेंद मोदी की अध्यकच्छता में कैबिनेट ने मंजूरी दई।

नई में सिक्छा नीती में इसकूली सिक्छा सें लेकें डिग्री लौक केऊ बड़े बदलाओ करे गए।


नई सिक्छा नीती - २०२० की मुख्य बातें ई तरा हैं -:

नई सिक्छा नीती के हिसाब सें पिराथमक सिक्छा यानी 
कक्छा पाँच लौक मातभासा, इसतानीय और  छेत्तीय भासा  पढ़ाई - लिखाई कराई जे। इए कक्छा आठ या ऊसें आगें  भी बढ़ाओ जा सकत।

बिदेसी भासन की पढ़ाई जूनियर सें होय। हालांकि नई सिक्छा नीती में जा बात भी कई गई के कोनऊँ भी भासा खों थोपो नईं जाएगो।

सिक्छा कौ अधकार कानून (आर०टी०ई०) खों कक्छा बारा
लौक या १८ साल की उमर लौक लागू करो जे। मिडडे मील के संगे अब सें हैल्दी नास्ता भी पाठसालन में दओ जे।

तिभासा आधारित इसकूली सिक्छा रै और देहाती इलाकन में स्टाफ कोआटर बनाए जें केबी इसकूलन की तर्ज पे।

इसकूलन में राजनीत और सिरकार कौ हस्तछेप तकरीबन खतम करो जे और एनसीआरटी (NCERT) पूरे देस में नोडल एजेंसी होए।

साल २०३० लौक इसकूली सिक्छा में १००% जीईआर (Gross Enrolment Ratio) के संगे माध्यमक इसतर लौक 'सबके लानें सिक्छा' (एजुकेशन फ़ॉर ऑल) कौ लच्छ रक्खो गओ।

अबै पाठसालन सें दूर रै रए दो करोर बालीबच्चन खों फिर सें  मुख्यधारा में लाओ जे। ईके लानें पाठसाला के बुनियादी ढांचे कौ बिकास और नए सिक्छा केंद बनाए जें।
 
इसकूली पाठ्यक्रम के १० + २ ढांचे की जगह ५ + ३ + ३ + ४ कौ नओ पाठयक्रम लागू करो जे। ईमें अब लौक दूर रक्खे गए ३ सें ६ साल के बालीबच्चन खों इसकूली पाठ्यक्रम के तहत लाबे कौ पिराओधान करो है। जिए दुनियाई इसतर पे बालीबच्चन के मानसिक बिकास के लानें  जरूरी मानो जा रओ।

इसकूलन में सैकच्छिक गतबिधियंन, पाठ्येतर गतबिधियंन
और बेबसाइक सिक्छा के बीच खास अंतर नईं करो जे।

जीडीपी का छै फीसदी बजट सिक्छा में खर्च करबे कौ लच्छ रक्खो गओ, जौन अबे ४.४३ फीसदी हैगो।

नई सिक्छा कौ लच्छ सन २०३० लौक तीन सें अठारा (३ - १८) आयु बर्ग के हर बालीबच्चा खों  कुआलटीबाई (गुनबत्तापूर्न) सिक्छा दई जे।

नई सिक्छा नीती में सिर्फ बीएड इंटर के बाद ४ सालिया, इसनातक के बाद २ सालिया और परइसनातक के बाद १ सालिय बीएड कोर्स होयगो।

ऊँची सिक्छा के लानें एक सिंगल रेगुलेटर रै  (कानून और मेडिकल खों छोडकें)। मतलब अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दए जें और पूरी ऊँची सिक्छा (हाइयर एजूकेसन) के लानें एक नेसनल हाइयर एजूकेसन रेगुलेटरी अथोरिटी कौ गठन करो जे।


पैली बेर मल्टीपल इंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू करो गओ है। आपऔरें इए ऐसें समज सकतई। आज की बिबस्ता में अगर चार साल इंजीनरी पढ़बे या छै सेमेस्टर पढ़बे के बाद कोनऊँ कारन सें आगे नईं पढ़ पात हैं, तो आपके पास कोनऊँ उपाओ नईं होत, लेकन मल्टीपल इंट्री और एग्जिट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जेहै। ईसें उन छात्त - छात्तरन खों भौत फायदा होए, जिनकी पढ़ाई बीच में कोनऊँ बजै सें छूट जात हैगी।

 ऊँची सिक्छा में केऊ बदलाओ करे गए हैं। जो छात्त - छात्तरा खोज (रिसर्च) करबो चाऊत हैं, बिनके लाजें चार साल की डिग्री होए और जो लोग नौकरी में जाबो चाऊत हैं, बे तीन साल की डिग्री कर सकतई।  लेकन जो रिसर्च में जाबो चाऊत, बे एक साल के एम०ए० (MA) के संगे चार साल की डिग्री के बाद सीधे पी०एच०डी० (PhD) कर सकतई। उनें एम०फिल० (M.Phil) की ज़रूरत नईं हुज्जे।


खोज / सोद करबे के काजे नेसनल रिसर्च फाउंडेसन (एनआरएफ) की इसतापना करी जे। एनआरएफ (NRF) का मुख्य उद्देस्य बिस्ओबिद्यालयन के माध्यम सें सोद की रफ्तार खों बढ़ाबा देबो है। एनआरफ सुतंत (फ्रीली) रूप सें सिरकार दुआरां गठित एक बोर्ड ऑफ गबर्नर्स दुआरां
सासित होए।


ई-पाठ्यक्रम (ऑनलाइन कोर्स) छेत्तीय भासन में बिकसित करे जें। बर्चुअल लैब बिकसित की जा रईं हैंगीं और एक देसीय/रास्ट्रीय सैकच्छिक टेक्नोलोजी फोरम (NETF) बनाओ जा रओ।

         अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात नई सिक्छा नीती की ई बात सें खुस है के प्राइमरी पाठसालन में सिक्छा मातभासा में दई जे। #बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन के दुआरां हम अखंड बुंदेलखंड में आंगनबाड़ी सें लेकें डिग्री और सोद इसतर (हाइयर एजूकेसन) लौक बुंदेली भासा की सिक्छा और बुंदेली माध्यम (मीडियम) में सिक्छा कौ नियम बनाबो चाऊत। हमें पूरौ भरोसो है के हमाए बुंदेलखंडी संगीसाथी   अखंड बुंदेलखंड के बिकास के लानें लड़ी जा रई यी लड़ाई में जरूर जीतें। जै जै बुंदेलखंड!


✒️ सतेंद सिंघ किसान
   जरबो गांओं, झाँसी
(संसतापक : बुंदेली बुंदेलखंड आंदोलन)
   ३०/७/२०२०

Wednesday, July 29, 2020

कोरोना पे बुंदेली ख्याल गीत....







गायक : जागे पाल, न्यूलीबाँसा 

बीडिओ साभार :  सुनील राजपूत, हमीरपुर





Tuesday, July 28, 2020

सतेंद सिंघ किसान की किसानबादी कबिता – किसान की आबाज









तुम औरें मारत रए भैंकर मार
और मार रए अबै भी
धीरें – धीरें सें
धरम, जात, करजा और कुरीतयंन मेँ बाँधकें
अन्धविश्वास, जुमले और बेअर्थ कानून बनाकें
पढ़ाई – लिखाई सें बंचित करकें
लूटत रए हमें

पर
अब हम जग गए हैं
अपन करम की कीमत पैचान गए हैं
अब सें हम अपन फसल कै दाम खुद तै करहैंगे
अपन मैनत कौ पूरो फल चखहैंगे

तुम भी हमाए करम की कीमत पैचानो
भूँख मिटाबे बायन कौ संग दो
नईं तो तुम भी मारे जाओगे
जल्दीं
हम किसानन की परिबर्तनबादी क्रान्ति में
सिर्फ बचेंगे अन्न उगाबेबाय
और बदलाओकारी जन…


✒️ सतेंद सिंघ किसान
   जरबो गांओं, झाँसी
(किसानी और हिंदी लेखक)
 भासा : किसानी
  रचना - रूप : कबिता
 रचनाकाल : ४/१२/२०१९_११:५० रात

#बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन



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महेस कटारे 'सुगम' कौ बुंदेली सॉनेट





ई जीवन की दुख तकलीफें काँ तक सैवें
 जोंन आज कौ वौइ काल कौ रोवौ धोवौ
 रातें बेइ खरारी खटिया जग कें सोवौ
अपने मन की खदकत बातें की सें कैवें 
सोचत हैं हर साल कर्ज सें पीछौ छूटै 
मेंनत करत लगावें लग्गत खून सुकावें
 करें किसानी पानी देवें और रखावें 
कभऊँ परत हैं औरे फिर कऊँ बादर रूठै 
फसल कभऊँ नें साबत आवै टोटौ परवै
सपनन की धूरा बँट जावै देखत देखत 
उमर चली गई मन के फौला सेंकत सेंकत
गुस्सा आवै परमेसुर खों उठा पटकवै 
कत हैं मनौ मिलत नंईयाँ राहत सरकारी 
है किसान की सांसऊँ हर सत्ता हत्यारी 

✒️ महेस कटारे 'सुगम'
   बीना, सागर - बुंदेलखंड
 (बुंदेली और हिंदी गजलकार)
 भासा - बुंदेली
 रचना रूप - सॉनेट

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#बुंदेलीसिनेमाकौइतहास




#बुंदेलीसिनेमाकौइतहास

हैजटैगबुंदेलीसिनेमाकौइतहास में हम आप लौक पौंचाएंगे बुंदेली सिनेमा - बुन्देलीबुड सें सम्बन्धित तमाम तथ्य....

हैजटैगबुंदेलीसिनेमाकौइतहास के तहत हम संचार के बिभिन्न माध्यम जैसे -  टीबी, रेडिओ, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टुइटर आदि पर अब पिरसारित बुंदेली सिनेमा सम्बन्धित सामग्री जैसे -  फिलमें, नाटक, गाना, समीक्छाएँ और लेख आदि पिरकासित करेंगे ताकि बुंदेली सिनेमा की सारी सामग्री एक जगा संरक्छित हो सके और बुंदेली सिनेमा कौ इतहास लिखो जा सके।

           आपकौ अपनो -:
        सतेंद सिंघ किसान
(संस्तापक - अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात)
      २८ जुलाई २०२०, झाँसी


#बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन

Sunday, July 26, 2020

जैति जैन 'नूतन' की कबिता - करिया सांप







पिरसंग - एक खेत में काम कर रए, बुंदेलखंड के गाँओं के किसान दम्पती और  एक करिया सांप (बाबा) आ जातई, जब का होत...

तनक देर भी ठांढ़ी नई रई
गदबद दौड़ लगा दई
जैसई देखो उने करिया सांप
सो मोय छोर के चल दई 

मौ कै रओ तनक रुक तौ जा
बा काय सुनबे पे आ रई
जैसई देखो उने करिया सांप
गदबद दौड़ लगा दई 

वैसे तो दुखत्ते घूंटा ऊँ के
तनक तनक में लौटत्ति
आयी मरबे कि बारी सो
मोय छोड़ के भग दई 

मैं तो खड़ो ऊके सामने सो
मोय डर नइयां का मरवे को
अपन खड़ी थी दो फुटा दूर
सो गदबद दौड़ लगा दई 

मिलन दो घरे, देखत ऊको
अपनी जान बचा लई
अब कैन दो घूटन की
सो मौ में आग लगा दई


✍🏻 जैती जैन 'नूतन'
     रानीपुर, झाँसी
(बुंदेली और हिंदी लेखका)
 भासा : बुंदेली
 रचना - रूप : कबिता
लेखका की बेबसाइट : https://jaytijain.wordpress.com



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Saturday, July 25, 2020

बुंदेली रैपर एसबन पीबन टीम कौ रैप गाना - बुलाती है पर जाने का नईं...

https://youtu.be/EovPSn6Uj_s





बीडिओ साभार : एसबन पीबन यूटूब चैनल



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सतेंद सिंघ किसान की कबिता - लिख तैं लिख...







लिख तैं लिख,
सबकी सच्चाई लिख।
सच लिखबे में डरिए मत,
असली बकबे में झिझकिए मत।
बेईमान तोय दबाएँगे,
तैं हरहाल में दबिऐ मत।
मौत सें कभऊँ डरिए मत,
काय मौत के बादइँ,
फिर सें जनम मिलत हैगो।
ईसें यी जनम तैं डर गओ,
तो खुदखों भी माफ नहीँ कर सकेगो।
लिख तैं लिख,
सबकी सच्चाई लिख………….

✍🏻 सतेंद सिंघ किसान
     जरबो गांओं, झाँसी
(किसानी और हिंदी लेखक)
 भासा : किसानी
  रचना - रूप : कबिता
  रचनाकाल : १५ जनबरी २०१९



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महेस कटारे 'सुगम' कीं पाँच गजलें

        



         (१.)

जे जाबें और बे आ जाबें का होंनें है
इनें हराबें उनें जिताबें का होंनें है

इनके बादे हबा हबाई सब हो गये
अब बे सपने हमें दिखाबें का होंनें है

जियत बाप खों पानी नईं दऔ सब जानत
मरे हाड़ गंगा लै जाबें का होंनें है

पथरन पै जल ढार ढार पथरा हो गये
सपरें खोरें,तिलक लगावें का होंनें है

हिन्दू और मुसलमानन की का कैनें
मंदर जाबें, मस्जिद जाबें का होंनें है

 
              (२.)

अपनौ मौ तौ खोलौ भौजी
अरे कछू तौ बोलौ भौजी

दुनिया खों कुतका पै धर दो
इज्जत सें तुम डोलौ भौजी

सब के सब हैं खीस निपोरा
छोटौ,बड़ौ,मँझोलौ भौजी

जोंन दिखा रऔ हट्टौ,कट्टौ
है भीतर सें पोलौ भौजी

जी के मन में दया रहम है
ऊ के संगै हो लो भौजी

बातन खों कैवे के पैलें
सुगम मनई मन तौलौ भौजी

(कुतका...... ठेंगा।खीस निपोरा.... दाँत दिखाने वाले)


              (३.)

जाबे खों कितऊँ तरसें तुम कऔ तौ मोरी गुँईयाँ
हम कैसें कढ़ें घर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

जुल्फन में तेल डारें बैठे गली में गुंडा
आबै फरूरी डर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

ऐसें लगत है जैसें सब छुट्टा साँड़ हो गये
बोये गये का हर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

मौड़ा बड़े घरन के,ऊपर सें हैं उचक्का
को बीद रऔ जबर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

जानें हतौ फरागत जे हैं कै टरत नँईयाँ
बैठे हम दुफर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

(कढ़ें....निकलें ।हर...हल ।बीदना......उलझना ।फरागत.... शौच। दुफर.... दोपहर)


              (४.)

मिला मिला कें पानी पी गये
सबरे खेत, किसानी पी गये

हड्डा अब हिलगे रै गये है
अपनी भरी ज्वानी पी गये

खुद नें तो जोरी नईं कच्छू
दौलत हती पुरानी पी गये

घर तौ घर बाहर तक चोरी
मुतकन की निगरानी पी गये

अब तौ बस खाँसत फिर रये हैं
जीवन की आसानी पी गये

(हिलगे......लटके ।मुतकन....बहुत सारे ।)



            (५.)

खोदी खाई गैरा दई है
नाक में कौंड़ी पैरा दई है

सजधज कें बरात निकरी ती
बीच घाम में ठैरा दई है

जोते,बखरे खेत डरे ते
भाँग सबई में ऐरा दई है

अफरन खों ब्यारू करवा रये
नियत लोभ नें भैरा दई है

नियम करम सब उल्टे कर दये
नद्दी नाँओं में तैरा दई है

बे हैं सबसे बड़े घोल्लाँ
धुजा धरम की फैरा दई है

(गैरा.... गहराना। नाक में कौड़ी पैराना......परेशान करना।
घाम... धूप ।ऐराना......बोना ।अफरन......भरे पेट वाले।
भैराना......लार टपकाना ।घोल्ला.....पीर ।धुजा... ध्वजा।)


✒️ महेस कटारे 'सुगम'
     बीना, सागर - बुंदेलखंड
  (बुंदेली और हिंदी गजलकार)
      भासा - बुंदेली
     रचना रूप - गजल


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Friday, July 24, 2020

बुंदेलखंडियन के लानें अखंड बुंदेलखंड काय नईं?




जब तेलगू भासियन के लानें आंध्रा और तेलंगाना राज्ज
तमिलन के लानें तमिलनाडु
मराठियन के लानें महारास्ट्र
गुजरातियन के लानें गुजरात
बंगालियन के लानें बंगाल
तो बुंदेलखंडियन के लानें अखंड बुंदेलखंड काय नईं?
बुंदेली भासियन के लानें अखंड बुंदेलखंड राज्ज 
बनें चज्जे और उते की राजभासा बुंदेली-किसानी...।

✒️ सतेंद सिंघ किसान 
   (संस्तापक : बुंदेली - बुंदेलखंड आंदोलन)
      २४ जुलाई २०२०, झाँसी


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Thursday, July 23, 2020

रज्जू राजा की गजल - ' लॉकडान में सूने रस्ते...'





लॉकडान की बिचित्त परस्थितियंन दिखाती रज्जू राजा की गजल - ' लॉकडान   में   सूने    रस्ते...'


लॉकडान   में   सूने    रस्ते।
बंद  डरे   बच्चन  के   बस्ते।।
दूने   दाम   बिकत    है   दारू।
और बिधायक मिल रये सस्ते।।
      घर   में   बंद   डरे    मजूर।
      छोटे    बेपारी  भए  मजबूर।।
      कलाकार की कार बिग गई।
      दो पईसा  खाँ  फिरत तरसते।।
करजा में गए डूब  किसान।
बरसत ना बादर भगबान।।
जो  नेता  बादे  कर  रए ते।
दूरई सें अब  करत नमस्ते।।
        रैली   आप   करत  श्रीमान।
        हम निकरे सो भओ चालान।।
        "रज्जू"  जौ  कानून  अनोखौ।
        जी  में  केबल  निर्धन फसते।।
****************************
****************************


✒️ रज्जू राजा
(बुंदेली लोककलाकार, डायरेक्टर - गुंजन एनजीओ)
नौगांओं छतरपुर, बुंदेलखंड
(भासा : किसानी - बुंदेली, रचना - रूप :  गजल)


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Wednesday, July 22, 2020

पबन जैन कीं तीन लघुकथाऐं



१. पनबेसरी 

राम नाम सत्य है,सत्य बोलो मुक्त है।
कहत भऐ ,बारी - बारी से कंदा बदलत भय अरथी मरघटाई तरफे ले जा रये ।
कंदा बदल कें  पाछे  आयो  रामकिशन बोलो , "अच्छो भओ दरूआ मर गओ, अब उकी लुगाई शांति से तो जी पेहे।"
दूसरे ने जबाव दओ "दवा  दारू को खर्चा तो बच गओ, पे उको रंडापा कैसे कटहे, चालीसक साल की तो हुईये।"
अंगारूं बढत जा रये ,दोई कानाफूसी कर रयेे,
"सरपंच ने पूछी तो हती उसे ,बोल आत्म हत्या लिखवा दयें ,कछू तो मिल जेहे तोय सरकार की तरफ से।"
"उने तुरतई जवाब दओ, दारू पी-पी के खदई तो मर गये, अबे उमरई का हती उनकी ।"
"सरपंच ने फिरसें समझाई  ,बोल तो फिर,थोरे चक्कर लगाने पर हे,आत्म हत्या को हल्ला करवा दयें, सबरी  लिखा पढी हम करवा लेंहे।"
"तुरतई बोली, रहन दो सरकार हमें  साबित करत- करत न जाने कितनी बार मरने पर हे।"
"बडी हिम्मत बारी है नट गई एकदम..."
"हओं तुमने सरपंच की नजरें  नई देखी हती।"
"तो रांड की अब का आरती उतरहे सब एसई देख हें।"
"तो, ते काय नही हाथ पकर लेत,कब लो रडुंआ घूमत फिरहे।"
"न रे भईया, हम उकी बरोबरी के नईया बडी समझदार,हिम्मत बारी और गंगा सी पवित्र हे बा।"
"तोय कैसे पतों..."
मिट्टी मरघटाई तक पोंच गई ,"देखो तो जो का हो रओ।" 
"मरघटाई में जनानी पहली बार देखी, कह रई दाग हमई देहें।"
"अब देखत जाओ का करहे पनबेसरी।"


२. हमाई फोटू

हमाये परोस की भौजी बड़ी रूपवान और होशियार हैं,आज उनने चाय पे बुलाओ।
बड़ी मीठी-मीठी बातें करती हैं ,निखालिस दूध की चाय पियाई पे ...
मैंने कई  "भौजी, हमें शक्कर की बीमारी नईया।"
वे बोली "ऐसई एक आध हफ्ता बंध के तो आत  रओ, हो जेहे ,आदत डार लो अभई से।"
हमाई समझ में कुछ न आई।
उनने कई "तुम्हारे भैया कछु काम के नईंया, हमने एक काम की बोली तो कहने लगे मर कें  भी जो काम नई करा पेहे।
तो हमने कई मरे तुमाय  दुश्मन। तो बे कहन लगे, हमारो तो कोऊ दुश्मन नईंया।
हमने बताई सगो भैया और परोसी से बडो कोऊ दुश्मन नई होत।"
"भौजी हम से का दुश्मनी तुमारी?"
"अरे तुमारी बात नईं कै  रये ,तुमसे काय की दुश्मनी, बस हमारो  एक काम करा दो, देखो हम लेन  में ना लग हैं । पेलें एक बेर गए थे सब ऐसे देख रये थे कि कछू न पूंछो हम तो तुरतई भग आये।"
"हमारे होत भये तुम लेन में काय लगहो ,
हम कबे काम आहें।"
"हमने जाई तो कही तुम्हारे भैया से,जो लो वोटर कारड़ ,राशन कारड़ और हमारी फोटो।"
"बडी़ सुंदर फोटो है जा तो बताओ करने का है?"
"बस हमारो आधार कारड़ बनवा दो।"


३. सनसनाते बान

"कहाँ मर गई करम जली?"
"तुमाय  मूड पे तो बैठी हूँ।"
"रोटी बनाई कि नई ?"
"कब की बन गई,ठूंस लो।"
"भोतई जुबान चलन लगी है।"
"तो का चुप्पई चाप बैठे रये।"
"कछू कर धर की तो है नइयां,जुबान चला रई गज भर की "
"और का करन लगे, कर तो रय गुलामी तुमाई और तुमाय बेटा की।"
"का गुलामी कर रई,पांच साल हो गए?"
"पांच का पंद्रह हो जेहे।"
"तो का ऐसई बैठी रेहे,बांझ।"
"ऐ अम्मा, मोय बांझ आंझ न कहियो,
तुमारो बेटा  कछू काम को नईयां,देखबे को ही पहलवान है।"
"का कह रई,नाशमिटी।"
"सांची कह रई सो मिर्ची लगन लगी।"
"ते सांची -आंची कछू न कह,ढकी है सो ढकी रहन दे।"
"तो का करन लगें।"
" आंखें मीच ले और मोय अगले बरस लो खिलोना दे दे खिलाबे।"

    ✒️ पबन जैन, जबलपुर
            भासा - बुंदेली  
(9425324978, jainpawan9954@gmail.com, 
 पंजाब नैशनल बैंक सें रिटार होबे के बाद लघुकथा के परिंदे मंच सें जुरे। हिन्दी और बुन्देली में समानांतर लेखन...)



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Tuesday, July 21, 2020

आज की ताजा खबर - बुंदेलखंड क्रांति दल चलाएगो 'लुटेरो बुंदेलखंड छोरो आंदोलन'



बुंदेलखंड क्रांति दल के रास्ट्रीय अध्यक्छ कुँअर सत्येन्द पाल सिंघ ने ऐलान करो है कि आज २२ जुलाई २०२० खों
बुंदेलखंड क्रांति दल की हर जिला मुख्यालय पे , तैसील , ब्लॉक , नगर, गाँव में मीटिंग करें और नीचे दए गए बिसय पे बिचार - बिमर्स करें। आप सब जनें भी अपने दोस्तन के संगे, अपने घर - परबार के संगे इन मुद्दों पे बिचार करें। आप अगर बुन्देलखंडी हैं, तो आपकौ भी तो जो फर्ज हैगो। आज एक - एक बुन्देलखंडी खों खुदखों नेता समज कें अपने संगी - साथियंन और परबार के संगे जरूर चर्चा करने हैगी।

 मीटिंग के बिसय ई तरा हैंगे -:
१.) कोरोना के कारन निगत - निगत, उपनए घर लौटबे बाय मजूर आज फिर सें पलायन खों मजबूर काय हैंगे।
२.) बुंदेलखंड की गरीबी, गाँओं में पानूं की कमी और रोजगार की कमी ने उनें पलायन अपनी मातभूम अखंड बुंदेलखंड सें पलायन करबे खों मजबूर कर दओ हैगो, ई पलायन सें मुक्ती कैंसे मिलहै।
३.) अलग बुंदेलखंड राज्ज बनने पेई इतनो बिकास हो सकेगो के अखंड बुंदेलखंड के लोग इतै रुक सकें और अपनी जीबिका चला पें।
४.) आंदोलन खों गाँव गाँव ले जाने आय जल्दी सें।
५.) आबे बायी तारीक ०९ अगस्त खों बुंदेलखंड के हर जिला में ग्यापन देकें भारत देस के रास्ट्रपति महोदय सें माँग करी जे के बे बुंदेलखंड राज्ज निर्मान आंदोलन पे सरकार खों आदेस दें।
६.)  आंदोलन कौ नाओ हुज्जे " लुटेरो बुंदेलखंड छोरो"
        
         जै जै बुंदेलखंड!

खबर - सतेंद सिंघ किसान (किसानी भासा)


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ईसुरी कीं पाँच फागें

       
 


   ( १.)

दिल की राम हमारी जानें

मित्र झूठ न मानें

हम तुम लाल बतात जात ते, आज रात बर्रानें

सा परतीत आज भई बातें, सपनेन काए दिखानें ?

ना हो, हो, देख लेत हैं, फूले नईं समानें

भौत दिनन से मोरो ईसुर तुमें लगौ दिल चानें

             (२.)

ऎंगर बैठ लेओ कछु काने, काम जनम भर रानें

सबखाँ लागौ रात जियत भर, जौ नइँ कभऊँ बड़ानें

करियो काम घरी भर रै कैं,बिगर कछु नइँ जानें

ई धंधे के बीच 'ईसुरी' करत-करत मर जानें ।

             (३.)

पतरें सोनें कैसे डोरा, रजऊ तुमाये पोरा

बड़ी मुलाम पकरतन घरतन लग न जाए नरोरा

पैराउत में दैया-मैया, दाबत परे दादोरा

रतन भरे सें भारी हो गये, पैरन कंचन बोरा

'ईसुर' कउँ का देखे ऎसे, नर-नारी का जोरा ।

             (४.)

इक दिन होत सबई का गौनों

होनों औ अनहोंनों ।

जाने परत सासरें साँसऊँ

बुरऔ लगै चाय नौंनों

जा ना बात काउ के बस की

हँसी मचै चाय रौंनों

राखौ चायें जौनों ईसुर

दयें इनईं भर सोनों ।

             (५.)

बखरी बसियत है भारे की दई पिया प्यारे की

कच्ची भींट उठी माटी की, छाई फूस चारे की

बे बंदेज बड़ी बे बाड़ा, जई में दस द्वारे की

एकऊ नईं किबार किबरियाँ, बिना कुची तारे की

ईसुर चाय निकारौ जिदना, हमें कौन उवारे की ।



✒️ ईसुरी


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#अखंडबुंदेलखंड



ऑनलाइन किसानी - बुंदेली पत्तिका 'अखंड बुंदेलखंड - akhandbundelkhand.blogspot.com'



अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात, झाँसी दुआरां आज २१ जुलाई २०२०, मंगल सें ऑनलाइन किसानी - बुंदेली पत्तिका 'अखंड बुंदेलखंड - akhandbundelkhand.blogspot.com' सुरुं करी जा रई, जीमें किसानी - बुंदेली भासा में रचित लेख, कबिता, कहानी, गीत, खबर आदि और ऑडिओ - बीडिओ बातचीत, संगीत और फिलमें आदि पिरकासित करी जें। 

आप सब जनें अपनी रचनाएँ इस पते पर भेज सकतई :
ईमेल - akhandbundelkhand@gmail.com
भोटसप - 9569911051

             आपकौ संगीसाथी : 
              सतेंद सिंघ किसान
       (संपादक - अखंड बुंदेलखंड)

Thursday, July 16, 2020

गुना के किसान परबार खों नियाओ मिलबे और पुलस खों कड़ी सें कड़ी सजा मिलबे...


बीडिओ साभार : बुंदेली बौछार





आजकल्ल में बुंदेलखंड के गुना में पुलस दुआरां गरीब किसानन की बर्बरता सें मारपीट करबो और उनें आत्महत्या
करबे खों बिबस करबो, जो दिखात हैगो के आज भारत देस में लोकतंत मर गओ हैगो। पिरसासन की तानासाई आ गई हैगी। पुलस बेर - बेर कानून अपने हांतन में लेत दिख रई हैगी। पुलस ने देस के सर्बोच्च कानून - संबिधान खों मानबो बंद कर दओ हैगो, जो बिलकुल भी ठीक नईंयां। हमारे संविधान में नियम है कि पुलिस किसी की हमाए संबिधान में नियम हैगो के पुलस कोऊ की बिना बजै मारपीट नईं कर सकत, इतै लौक के बिना मजिस्टेट के आदेस के कोनऊ आमनागरिक खों गिरप्तार भी नईं कर सकत। लेकन गुना में क्रूर पुलस ने संबिधान के खिलाफ जाकें सारी दुनिया की भूक मिटाबै बाय, हमाए अन्नदाता, किसान परबार पे लठियाँ भांजीं हैंगीं। जा भौत सरम की बात हैगी। देस की सिरकारें करोड़न खों हजम कर जाबे बाय भगौड़े नीरओ मोदी और बिजय माल्या पे कार्रबाई करबे पे चुप हैगीं। लेकन सिरकारें किसान आंदोलनन खों कुचेलबे में कोनऊ कसर नईं छोर रईं। सिरकारें किसान बिरोधी नीतयाँ बनाकेँ उनको सोसन और बढ़ा रई हैंगीं, फसलन के दाम गिर रए हैंगे और फसलन को सींचबे और टैक्टर में पिरयोग करे जाबे बाय पिटरोल - डीजल और लाईट के दाम लगातार बढ़ रए हैंगे। कोरोना महामारी के  दौरान लगे लॉकडाउन में किसानों की कोरोना महांमारी के दौरान लगे लोकडौन में किसानन की भौतई बुरई दसा भई, उनें तरकाईं रोड पे फेंकनें परीं या ढोर - बछेउअन खों खुआने परीं कायके सब बजार बंद हते। आज देस में गरीब किसान अगर करजा के बोझ सें आत्महत्या कर ले, या फिर पुलस की लठियाँ खा - खा कें मर जाए तो सिरकारें और मीडिया ऊ पे जादां धियान नईं देत। सिरकारन खों किसानन की समस्या खों हल करने आय, उनके कल्यान के लानें नीतयाँ बनाने आय, किसान आयोग को गठन जल्दईं करने आए। सिरकारें अगर किसानन पे धियान नईं देंयगीं तो गुना की तरा रोजीना किसासन पे अत्याचार होय और एक दिनाँ किसानईं नईं बचें। ऐइसें हम कै रए के किसान बचाओ - देस बचाओ। हम सिरकार सें माँग करत हैंगे के गुना में किसान परबार पे अत्याचार करबे बाय पुलसबारन के संगे बैसोई सलूक करो जाए, जैसो पुलस ने किसान पे करो। और सब पुलसबारन खों अबेहाल बर्खास्त करो जाए और किसानन के संगे नियाओ करो जाए।

 ✒️ सतेंद सिंघ किसान 'कुशराज झाँसी' 
         (१६/७/२०२०)





Tuesday, July 14, 2020

राष्ट्रीय बेबीनार : बुन्देलीभाषा, संस्कृति , साहित्य एवं लोककलाएं

आप औरें नेओते हैंगे....

(आप सादर आमंत्रित हैं..)

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी, दिल्ली
एवं
बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव समिति, झाँसी
का संयुक्त आयोजन

एक दिवसीय राष्ट्रीय बेबीनार -:

" बुन्देलीभाषा, संस्कृति , साहित्य एवं लोककलाएं " 

रविवार, 19 जुलाई, 2020

पोस्टर साभार : सोसल मीडिया

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जरबो गाँव में रोजीना साफ - सफाई हो...









इन फोटुओं में साफ दिख रओ हैगो के जरबो गाँओं, ब्लाक बड़ेगाँओं, जिला झाँसी में गाँओं की मैन गली पे बनी नालियाँ, एक तरफ तो बंद हो गईं हैंगीं और दूसरी तरफ हम देख रए हैंगे के मईनन सें जमादार के ना आबे की बजै सें नालियंन में कीचड़ जम गओ हैगो, जीमें मछरा भी पैदा हो गए हैंगे। मछरन सें मलेरिया, बुखार आदि बीमारी फैलबे कौ डर है। ऐईसें हम चाऊत के गाँओं की साफ - सफाई रोजीना होबे...)

(इन तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि  जरबो गांव, ब्लॉक बड़ागाँव, जिला झाँसी में गाँव की मुख्य गली (सड़क) पर बनी नालियाँ, एक तरफ तो बन्द हो गईं हैं और दूसरी तरफ हम देख रहें हैं कि महीनों से सफाईकर्मी के न आने की वजह से नालियाँ में कीचड़ का जमाव हो गया है, जिसमें मच्छर भी पैदा हो गए हैं। मच्छरों से मलेरिया, बुखार आदि बीमारियाँ फैलने की आशंका है। इसलिए हम चाहते हैं कि गांव की साफ - सफाई सुचारू रूप से हो...)

फोटू साभार : सतेंद सिंघ किसान (०८/७/२०२०)

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Monday, July 13, 2020

बुंदेली तकता (#बुंदेलीतकता #Bundelitakta)




'बुंदेली तकता' पिरोगिराम में हम आपखों दिखात हैं, अखंड बुंदेलखंड की कला, संसकिरती, समाज, गाँओं, खेती - किसानी, पर्याबरन और आज कौ अखंड बुंदेलखंड...।

('बुन्देली तकता' कार्यक्रम में हम आपको दिखाते हैं, अखण्ड बुन्देलखण्ड की कला, संस्कृति, समाज, गाँव, कृषि, पर्यावरण और आज का अखण्ड बुन्देलखण्ड...।)

#बुंदेलीतकता #Bundelitakta

  आपकौ संगी-साथी :
  सतेंद सिंघ किसान
(संस्तापक - अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात)
०९ साओन २०७७बिक्रमी
 (१४ जुलाई २०२०), जरबोगाँओं

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Sunday, July 12, 2020

प्रस्तावित अखंड बुंदेलखंड (बुंदेलीभाषी क्षेत्र) में शामिल जिले -:



उ०प्र० - झाँसी, ललितपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर, बाँदा, चित्रकूट; 
म०प्र० - सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, कटनी, दमोह, पन्ना, छतरपुर, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, ग्वालियर, दतिया, भिण्ड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद, हरदा, नरसिंहपुर, सिवनी, जबलपुर...।


✒️ सतेंद सिंघ किसान 'कुशराज झाँसी'
     

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पिरिसताबित अखंड बुंदेलखंड (बुंदेलीभासी छेत्त) में सामिल जिले





उ०प० - झाँसी, ललतपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर, बाँदा, चित्तकूट; 
म०प० - सागर, टीकमगढ़, निबाई, कटनी, दमोय, पन्ना, छतरपुर, सतना, रीबा, सीदी , सिंगरौली
गबालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, सियोपुर, शिबपुरी, गुना, असोकनगर, बिदिसा, रायसेन, हौसंगाबाद, हरदा, नरसिंघपुर, सिबनी, जबलपुर...।

✒️ सतेंद सिंघ किसान 'कुशराज झाँसी'
     

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बुंदेली - बुंदेलखंड आंदोलन के उद्देश्य / माँगे -:




(१.) हमाई मातृभाषा बुन्देली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
(२.) बुन्देली को मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्ष और उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र यानि अखंड बुंदेलखंड की राजभाषा यानि कार्यालयी भाषा (राजभासा बुंदेली) का दर्जा दिया जाए।
(३.) बुन्देलखण्ड के समस्त शिक्षण संस्थानों में प्राथमिक शिक्षा (प्राइमरी एजुकेशन) से लेकर स्नातक तक बुन्देली भाषा अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ाई जाए और बुन्देली को शिक्षा का माध्यम भी बनाया जाए।
(४.) बुन्देलखण्ड की समस्याओं के समाधान के लिए और बुन्देलखण्ड के चहुँमुखी विकास के लिए अखण्ड बुन्देलखण्ड राज्य का गठन किया जाए।

✒️ सतेंद सिंघ किसान 'कुशराज झाँसी'
     

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Saturday, July 11, 2020

बुंदेलखंड : बिबरन पत्तिका

उत्तर परदेस के बित्त और संख्या पिरभाग, राज्ज नियोजन संसतान, नियोजन बिभाग दुआरां पिरकासित " बुंदेलखंड - उत्तर परदेस : समाजार्थक परदिरस्य " नाँओ की बिबरन - पत्तिका में दए गए बुन्देलखण्ड सें संबंधत महत्तओपूर्न आंकरे...

(उत्तर प्रदेश के अर्थ एवं संख्या प्रभाग, राज्य नियोजन संस्थान, नियोजन विभाग द्वारा प्रकाशित "बुन्देलखण्ड - उत्तर प्रदेश : समाजार्थिक परिदृश्य" नामक विवरण - पुस्तिका में दिए गए बुन्देलखण्ड से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण आँकड़े...)

https://drive.google.com/file/d/1DCIvVuRm_oKfakpw_p1kPUo288PDH_Ff/view?usp=drivesdk






#बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन

बुंदेली कौ छेत्त (बुन्देली का क्षेत्र) -


बुंदेली भासा बुंदेलखंड की मुख्य भासा हैगी, जो बुंदेलखंड के इन जिलन में मुख्य रूप सें बोली जाऊत : उ०प० - झाँसी, ललतपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर, बाँदा, चित्तकूट;
म०प० - सागर, टीकमगढ़, निबाई, कटनी, दमोय, पन्ना, छतरपुर, सतना, रीबा, सीदी , सिंगरौली
गबालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, सियोपुर, शिबपुरी, गुना, असोकनगर, बिदिसा, रायसेन, हौसंगाबाद, हरदा, नरसिंघपुर, सिबनी, जबलपुर...।

(बुन्देली भाषा बुन्देलखण्ड की मुख्य भाषा है, जो बुन्देलखण्ड के इन जिलों में मुख्य रूप से बोली जाती है : उ०प्र० - झाँसी, ललितपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर, बाँदा, चित्रकूट; म०प्र० - सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, कटनी, दमोह, पन्ना, छतरपुर, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, ग्वालियर, दतिया, भिण्ड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद, हरदा, नरसिंहपुर, सिवनी, जबलपुर...।)

#बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन 


मिसन - बुंदेली भासा कौ इतहास




बुंदेली - बुंदेलखंड आंदोलन के अंतरगत आज ११ जुलाई २०२०, सनीचर सें " मिसन - बुंदेली भासा कौ इतहास " चलाओ जा रओ। जीके दुआरां अब लौक 'बुंदेली भासा और संसकिरती' के लानें, दुनिया की बिभिन्न भासन और माध्यम में करे गए कामों जैसें : बुंदेली भासा में साहत्य रचना, किताब, इतिहास, सोद लेखन, तथ्य आदि और डिजटल माध्यम दुआरां बुंदेली के पिरचार - पिरसार में करे जा रए कामन खों आप लौक पौंचाओ जे और बुंदेली के पिरती जागरूकता फैलाई जे।

(बुन्देली - बुन्देलखण्ड आंदोलन के अंतर्गत आज 11 जुलाई 2020, शनिवार से " मिशन - बुन्देली भाषा का इतिहास " चलाया जा रहा है। जिसके द्वारा अब तक 'बुन्देली भाषा और संस्कृति' के लिए, विश्व की विभिन्न भाषाओं और माध्यमों में किए गए कार्यों जैसे : बुन्देली भाषा में साहित्य सृजन, किताब, इतिहास, शोध लेखन, तथ्य आदि और डिजिटल माध्यमों द्वारा बुन्देली के प्रचार - प्रसार में किए जा रहे कार्यों को आप तक पहुंचाया जाएगा और बुन्देली के प्रति जागरूकता फैलायी जाएगी।)

आपकौ साथी - :
सतेंद सिंघ किसान 'कुशराज झाँसी'
(संस्तापक - अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात)
जरबो गाँओ, झाँसी 


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Thursday, July 9, 2020

बुंदेली - बुंदेलखंड आंदोलन


आज 09 जुलाई 2020 से, अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात (झाँसी, बुंदेलखंड) द्वारा बुंदेली भासा (बुन्देली भाषा) को उसका असली सम्मान दिलाने के लिए और अखंड बुन्देलखण्ड की पहचान और अस्तित्त्व बनाए रखने के लिए
बुंदेली - बुंदेलखंड आंदोलन (#बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन , #BundeliBundelkhandMovement) चलाया जा रहा है।

जिसके उद्देश्य इस प्रकार हैं -

(१.) हमाई मातृभाषा बुन्देली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
(२.) बुन्देली को मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की राजभाषा यानी कार्यालयी भाषा (राजभासा बुंदेली) का दर्जा दिया जाए।
(३.) बुन्देलखण्ड के समस्त शिक्षण संस्थानों में प्राथमिक शिक्षा (प्राइमरी एजुकेशन) से लेकर स्नातक तक बुन्देली भाषा अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ाई जाए और बुन्देली को शिक्षा का माध्यम भी बनाया जाए।
(४.) बुन्देलखण्ड की समस्याओं के समाधान के लिए और बुन्देलखण्ड के चहुँमुखी विकास के लिए अखण्ड बुन्देलखण्ड राज्य का गठन किया जाए।

आप सभी बुंदेलखंडवासियों और बुन्देलीभासी जनों से हाथ जोड़ निवेदन है कि आप बुंदेली - बुंदेलखंड आंदोलन में सहयोगी बनें और अपनी मातृभूमि बुन्देलखण्ड और मातृभाषा बुन्देली के अस्तित्त्व को बनाए रखने लिए डिजिटल क्रान्ति लाएँ। तभी हम सबजनों की पहचान बनी रहेगी।

डिजिटल क्रांति में आप ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया साइट्स जैसे- फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, व्हाट्सएप्प इत्यादि पर अपने विचारों के साथ ये हैशटैग चलाएँ और आंदोलकारियों के विचारों को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

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#BundelkhandLivesMatter
#Bundeli #Kisani #Bundelkhand

आपका साथी - :
सतेंद सिंघ किसान 'कुशराज झाँसी'
(संस्थापक - अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात)
जरबो गाँव, झाँसी


किसानी भासा - सतेंद सिंघ किसान 'भाईसाब'


जी तरा हिंदी भारत देस की राजभासा है। ओई तरा बुंदेली (बुंदेलखंडी) भी बुंदेलखंड की राजभासा हती और आज अखंड बुंदेलखंड की मुख्य भासा है, जो देबनागरी लिपी में ही लिखी जाऊत। आज के टैम बुंदेली सबसें जादां गाँओ - देहात में किसान बोलत हैं और रोजीना के कामकाज में पिरयोग करत हैं, ऐइसें हम बुंदेली खों 'किसानी भासा' कैत हैं। हम चाऊत के बुंदेली खों 'किसानी भासा' ही कओ जाए और ईको मानकीकरन करकें राजकाज और सिच्छा (शिक्षा) की भासा बना दई जाए, जीसें किसानभूम बुंदेलखंड कौ चौतरफा बिकास हो सके।

भासा की सबसे जादां जौन जरूरी इकाई है, बा हैगी -  'बरन' और बरनन कौ समूय है - बरनमाला।
ऐइसें किसानी भासा की बरनमाला यी तरा हैगी।
यीमें भी हिंदी और अंग्रेजी (इंगलस) की तरा सोअर (स्वर - Vowels) और बियंजन (व्यंजन - Consonants) होत हैं। यीमें हिंदी की तरा सँयुक्त बियंजन नईं होत। हिंदी की तरा मातराएं (मात्राएँ) भी होत हैं।

सोअर - अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अ:।

बियंजन - क, ख, ग, घ, 

च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड, ढ,

त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म

य, र, ल,

स, ह ।

किसानी की मातराएं यी तरा हैं -
बरन, मातरा कौ चिन्न और ऊसें बनाबे बाय सब्द :

अ (...) - क - कल्ल
आ (ा)- का - कक्का
इ (ि)- कि – किताब
ई (ी) – की -कील
उ (ु) - कु – कुत्ता
ऊ (ू) - कू - कूटनीत
ए (े) - के – केला
ऐ (ै) - कै – कैसो
ओ (ो) - को - कोयल
औ (ौ)- कौ - कौसल
अं (ं) - अं - अंक
अः (ः) अः - अतः

किसानी खों जैसो लिखो जात, बैसेई पढो जात।

✒️ सतेंद सिंघ किसान 'भाईसाब'
       (झाँसी बुंदेलखंड) ८/७/२०२०


अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात कौ परचय...


अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात (झाँसी बुंदेलखंड) किसानभूम - बुंदेलखंड और किसानी - बुंदेली (बुंदेलखंडी) भासा के बिकास खों समरपत संगठन हैगो। जीके संचालक - सतेंद सिंघ किसान 'भाईसाब' हैं। जिनको बास्तबिक नाओ  
'गिरजासंकर कुसबाहा' हैगो। जिनने दिल्ली के हंसराज कालेज, दिल्ली बिस्यबिद्यालय सें बी०ए० हिन्दी (बिसेस) की डिग्री ली है। जे हिन्दी में 'कुशराज झाँसी' उपनाओ सें लिखत हैंगे और किसानी - बुंदेली में सतेंद सिंघ किसान 'भाईसाब' नाओ सें।

आप सबसें हांत जोरकें निबेदन है के आप भी फिर सें  अखंड बुंदेलखंड बनाबे में सैयोगी बनें और अपने बुन्देली संसकिरती, भासा और समाज खों लैकें जागरूक होएं तबई आप सब की पैचान बनी रे और हमाए बुंदेलखंड की भी।

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