Thursday, July 9, 2020

किसानी भासा - सतेंद सिंघ किसान 'भाईसाब'


जी तरा हिंदी भारत देस की राजभासा है। ओई तरा बुंदेली (बुंदेलखंडी) भी बुंदेलखंड की राजभासा हती और आज अखंड बुंदेलखंड की मुख्य भासा है, जो देबनागरी लिपी में ही लिखी जाऊत। आज के टैम बुंदेली सबसें जादां गाँओ - देहात में किसान बोलत हैं और रोजीना के कामकाज में पिरयोग करत हैं, ऐइसें हम बुंदेली खों 'किसानी भासा' कैत हैं। हम चाऊत के बुंदेली खों 'किसानी भासा' ही कओ जाए और ईको मानकीकरन करकें राजकाज और सिच्छा (शिक्षा) की भासा बना दई जाए, जीसें किसानभूम बुंदेलखंड कौ चौतरफा बिकास हो सके।

भासा की सबसे जादां जौन जरूरी इकाई है, बा हैगी -  'बरन' और बरनन कौ समूय है - बरनमाला।
ऐइसें किसानी भासा की बरनमाला यी तरा हैगी।
यीमें भी हिंदी और अंग्रेजी (इंगलस) की तरा सोअर (स्वर - Vowels) और बियंजन (व्यंजन - Consonants) होत हैं। यीमें हिंदी की तरा सँयुक्त बियंजन नईं होत। हिंदी की तरा मातराएं (मात्राएँ) भी होत हैं।

सोअर - अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अ:।

बियंजन - क, ख, ग, घ, 

च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड, ढ,

त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म

य, र, ल,

स, ह ।

किसानी की मातराएं यी तरा हैं -
बरन, मातरा कौ चिन्न और ऊसें बनाबे बाय सब्द :

अ (...) - क - कल्ल
आ (ा)- का - कक्का
इ (ि)- कि – किताब
ई (ी) – की -कील
उ (ु) - कु – कुत्ता
ऊ (ू) - कू - कूटनीत
ए (े) - के – केला
ऐ (ै) - कै – कैसो
ओ (ो) - को - कोयल
औ (ौ)- कौ - कौसल
अं (ं) - अं - अंक
अः (ः) अः - अतः

किसानी खों जैसो लिखो जात, बैसेई पढो जात।

✒️ सतेंद सिंघ किसान 'भाईसाब'
       (झाँसी बुंदेलखंड) ८/७/२०२०


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