बीडिओ साभार : बुंदेली बौछार
आजकल्ल में बुंदेलखंड के गुना में पुलस दुआरां गरीब किसानन की बर्बरता सें मारपीट करबो और उनें आत्महत्या
करबे खों बिबस करबो, जो दिखात हैगो के आज भारत देस में लोकतंत मर गओ हैगो। पिरसासन की तानासाई आ गई हैगी। पुलस बेर - बेर कानून अपने हांतन में लेत दिख रई हैगी। पुलस ने देस के सर्बोच्च कानून - संबिधान खों मानबो बंद कर दओ हैगो, जो बिलकुल भी ठीक नईंयां। हमारे संविधान में नियम है कि पुलिस किसी की हमाए संबिधान में नियम हैगो के पुलस कोऊ की बिना बजै मारपीट नईं कर सकत, इतै लौक के बिना मजिस्टेट के आदेस के कोनऊ आमनागरिक खों गिरप्तार भी नईं कर सकत। लेकन गुना में क्रूर पुलस ने संबिधान के खिलाफ जाकें सारी दुनिया की भूक मिटाबै बाय, हमाए अन्नदाता, किसान परबार पे लठियाँ भांजीं हैंगीं। जा भौत सरम की बात हैगी। देस की सिरकारें करोड़न खों हजम कर जाबे बाय भगौड़े नीरओ मोदी और बिजय माल्या पे कार्रबाई करबे पे चुप हैगीं। लेकन सिरकारें किसान आंदोलनन खों कुचेलबे में कोनऊ कसर नईं छोर रईं। सिरकारें किसान बिरोधी नीतयाँ बनाकेँ उनको सोसन और बढ़ा रई हैंगीं, फसलन के दाम गिर रए हैंगे और फसलन को सींचबे और टैक्टर में पिरयोग करे जाबे बाय पिटरोल - डीजल और लाईट के दाम लगातार बढ़ रए हैंगे। कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में किसानों की कोरोना महांमारी के दौरान लगे लोकडौन में किसानन की भौतई बुरई दसा भई, उनें तरकाईं रोड पे फेंकनें परीं या ढोर - बछेउअन खों खुआने परीं कायके सब बजार बंद हते। आज देस में गरीब किसान अगर करजा के बोझ सें आत्महत्या कर ले, या फिर पुलस की लठियाँ खा - खा कें मर जाए तो सिरकारें और मीडिया ऊ पे जादां धियान नईं देत। सिरकारन खों किसानन की समस्या खों हल करने आय, उनके कल्यान के लानें नीतयाँ बनाने आय, किसान आयोग को गठन जल्दईं करने आए। सिरकारें अगर किसानन पे धियान नईं देंयगीं तो गुना की तरा रोजीना किसासन पे अत्याचार होय और एक दिनाँ किसानईं नईं बचें। ऐइसें हम कै रए के किसान बचाओ - देस बचाओ। हम सिरकार सें माँग करत हैंगे के गुना में किसान परबार पे अत्याचार करबे बाय पुलसबारन के संगे बैसोई सलूक करो जाए, जैसो पुलस ने किसान पे करो। और सब पुलसबारन खों अबेहाल बर्खास्त करो जाए और किसानन के संगे नियाओ करो जाए।
✒️ सतेंद सिंघ किसान 'कुशराज झाँसी'
(१६/७/२०२०)

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