( १.)
दिल की राम हमारी जानें
मित्र झूठ न मानें
हम तुम लाल बतात जात ते, आज रात बर्रानें
सा परतीत आज भई बातें, सपनेन काए दिखानें ?
ना हो, हो, देख लेत हैं, फूले नईं समानें
भौत दिनन से मोरो ईसुर तुमें लगौ दिल चानें
(२.)
ऎंगर बैठ लेओ कछु काने, काम जनम भर रानें
सबखाँ लागौ रात जियत भर, जौ नइँ कभऊँ बड़ानें
करियो काम घरी भर रै कैं,बिगर कछु नइँ जानें
ई धंधे के बीच 'ईसुरी' करत-करत मर जानें ।
(३.)
पतरें सोनें कैसे डोरा, रजऊ तुमाये पोरा
बड़ी मुलाम पकरतन घरतन लग न जाए नरोरा
पैराउत में दैया-मैया, दाबत परे दादोरा
रतन भरे सें भारी हो गये, पैरन कंचन बोरा
'ईसुर' कउँ का देखे ऎसे, नर-नारी का जोरा ।
(४.)
इक दिन होत सबई का गौनों
होनों औ अनहोंनों ।
जाने परत सासरें साँसऊँ
बुरऔ लगै चाय नौंनों
जा ना बात काउ के बस की
हँसी मचै चाय रौंनों
राखौ चायें जौनों ईसुर
दयें इनईं भर सोनों ।
(५.)
बखरी बसियत है भारे की दई पिया प्यारे की
कच्ची भींट उठी माटी की, छाई फूस चारे की
बे बंदेज बड़ी बे बाड़ा, जई में दस द्वारे की
एकऊ नईं किबार किबरियाँ, बिना कुची तारे की
ईसुर चाय निकारौ जिदना, हमें कौन उवारे की ।
✒️ ईसुरी
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