Thursday, July 30, 2020

नई सिक्छा नीती - २०२० लागू : छेत्तीय भासन में चलाए जें ई-पाठ्यक्रम....








कल्ल, २९ जून २०२० को भारत सिरकार नें नई सिक्छा नीती लागू कर दई, जीसें देस की सिक्छा - बिबस्ता में केऊ बदलाओ देखबे मिलहैं। अबसें मानओ संसादन बिकास मंतरालय खों सिक्छा मंतरालय कओ जे।

 केंदीय मानओ संसादन बिकास मंतरी रमेस पोखरियाल निसंक और सूचना पिरसारन मंतरी प्रकास जाबडेकर नें बुद्द उआर खों प्रेस - मीटिंग कर ईकी जानकारी दई।

यीसें पैलें सन १९८६ में सिक्छा नीती लागू करी गई ती।  सन १९९२ में यी नीती में कछू संसोदन करे गए ते। यानी ३४ साल बाद देस में एक नई सिक्छा नीती लागू करी जा रई।

इसरो कै पूर्ब मुखिया कस्तूरीरंगन की अध्यकच्छता में बिसेसग्यन की एक कमेटी नें ईकी रूपरेखा तज्जार करी। जिए प्रधानमंतरी नरेंद मोदी की अध्यकच्छता में कैबिनेट ने मंजूरी दई।

नई में सिक्छा नीती में इसकूली सिक्छा सें लेकें डिग्री लौक केऊ बड़े बदलाओ करे गए।


नई सिक्छा नीती - २०२० की मुख्य बातें ई तरा हैं -:

नई सिक्छा नीती के हिसाब सें पिराथमक सिक्छा यानी 
कक्छा पाँच लौक मातभासा, इसतानीय और  छेत्तीय भासा  पढ़ाई - लिखाई कराई जे। इए कक्छा आठ या ऊसें आगें  भी बढ़ाओ जा सकत।

बिदेसी भासन की पढ़ाई जूनियर सें होय। हालांकि नई सिक्छा नीती में जा बात भी कई गई के कोनऊँ भी भासा खों थोपो नईं जाएगो।

सिक्छा कौ अधकार कानून (आर०टी०ई०) खों कक्छा बारा
लौक या १८ साल की उमर लौक लागू करो जे। मिडडे मील के संगे अब सें हैल्दी नास्ता भी पाठसालन में दओ जे।

तिभासा आधारित इसकूली सिक्छा रै और देहाती इलाकन में स्टाफ कोआटर बनाए जें केबी इसकूलन की तर्ज पे।

इसकूलन में राजनीत और सिरकार कौ हस्तछेप तकरीबन खतम करो जे और एनसीआरटी (NCERT) पूरे देस में नोडल एजेंसी होए।

साल २०३० लौक इसकूली सिक्छा में १००% जीईआर (Gross Enrolment Ratio) के संगे माध्यमक इसतर लौक 'सबके लानें सिक्छा' (एजुकेशन फ़ॉर ऑल) कौ लच्छ रक्खो गओ।

अबै पाठसालन सें दूर रै रए दो करोर बालीबच्चन खों फिर सें  मुख्यधारा में लाओ जे। ईके लानें पाठसाला के बुनियादी ढांचे कौ बिकास और नए सिक्छा केंद बनाए जें।
 
इसकूली पाठ्यक्रम के १० + २ ढांचे की जगह ५ + ३ + ३ + ४ कौ नओ पाठयक्रम लागू करो जे। ईमें अब लौक दूर रक्खे गए ३ सें ६ साल के बालीबच्चन खों इसकूली पाठ्यक्रम के तहत लाबे कौ पिराओधान करो है। जिए दुनियाई इसतर पे बालीबच्चन के मानसिक बिकास के लानें  जरूरी मानो जा रओ।

इसकूलन में सैकच्छिक गतबिधियंन, पाठ्येतर गतबिधियंन
और बेबसाइक सिक्छा के बीच खास अंतर नईं करो जे।

जीडीपी का छै फीसदी बजट सिक्छा में खर्च करबे कौ लच्छ रक्खो गओ, जौन अबे ४.४३ फीसदी हैगो।

नई सिक्छा कौ लच्छ सन २०३० लौक तीन सें अठारा (३ - १८) आयु बर्ग के हर बालीबच्चा खों  कुआलटीबाई (गुनबत्तापूर्न) सिक्छा दई जे।

नई सिक्छा नीती में सिर्फ बीएड इंटर के बाद ४ सालिया, इसनातक के बाद २ सालिया और परइसनातक के बाद १ सालिय बीएड कोर्स होयगो।

ऊँची सिक्छा के लानें एक सिंगल रेगुलेटर रै  (कानून और मेडिकल खों छोडकें)। मतलब अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दए जें और पूरी ऊँची सिक्छा (हाइयर एजूकेसन) के लानें एक नेसनल हाइयर एजूकेसन रेगुलेटरी अथोरिटी कौ गठन करो जे।


पैली बेर मल्टीपल इंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू करो गओ है। आपऔरें इए ऐसें समज सकतई। आज की बिबस्ता में अगर चार साल इंजीनरी पढ़बे या छै सेमेस्टर पढ़बे के बाद कोनऊँ कारन सें आगे नईं पढ़ पात हैं, तो आपके पास कोनऊँ उपाओ नईं होत, लेकन मल्टीपल इंट्री और एग्जिट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जेहै। ईसें उन छात्त - छात्तरन खों भौत फायदा होए, जिनकी पढ़ाई बीच में कोनऊँ बजै सें छूट जात हैगी।

 ऊँची सिक्छा में केऊ बदलाओ करे गए हैं। जो छात्त - छात्तरा खोज (रिसर्च) करबो चाऊत हैं, बिनके लाजें चार साल की डिग्री होए और जो लोग नौकरी में जाबो चाऊत हैं, बे तीन साल की डिग्री कर सकतई।  लेकन जो रिसर्च में जाबो चाऊत, बे एक साल के एम०ए० (MA) के संगे चार साल की डिग्री के बाद सीधे पी०एच०डी० (PhD) कर सकतई। उनें एम०फिल० (M.Phil) की ज़रूरत नईं हुज्जे।


खोज / सोद करबे के काजे नेसनल रिसर्च फाउंडेसन (एनआरएफ) की इसतापना करी जे। एनआरएफ (NRF) का मुख्य उद्देस्य बिस्ओबिद्यालयन के माध्यम सें सोद की रफ्तार खों बढ़ाबा देबो है। एनआरफ सुतंत (फ्रीली) रूप सें सिरकार दुआरां गठित एक बोर्ड ऑफ गबर्नर्स दुआरां
सासित होए।


ई-पाठ्यक्रम (ऑनलाइन कोर्स) छेत्तीय भासन में बिकसित करे जें। बर्चुअल लैब बिकसित की जा रईं हैंगीं और एक देसीय/रास्ट्रीय सैकच्छिक टेक्नोलोजी फोरम (NETF) बनाओ जा रओ।

         अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात नई सिक्छा नीती की ई बात सें खुस है के प्राइमरी पाठसालन में सिक्छा मातभासा में दई जे। #बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन के दुआरां हम अखंड बुंदेलखंड में आंगनबाड़ी सें लेकें डिग्री और सोद इसतर (हाइयर एजूकेसन) लौक बुंदेली भासा की सिक्छा और बुंदेली माध्यम (मीडियम) में सिक्छा कौ नियम बनाबो चाऊत। हमें पूरौ भरोसो है के हमाए बुंदेलखंडी संगीसाथी   अखंड बुंदेलखंड के बिकास के लानें लड़ी जा रई यी लड़ाई में जरूर जीतें। जै जै बुंदेलखंड!


✒️ सतेंद सिंघ किसान
   जरबो गांओं, झाँसी
(संसतापक : बुंदेली बुंदेलखंड आंदोलन)
   ३०/७/२०२०

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