लॉकडान की बिचित्त परस्थितियंन दिखाती रज्जू राजा की गजल - ' लॉकडान में सूने रस्ते...'
लॉकडान में सूने रस्ते।
बंद डरे बच्चन के बस्ते।।
दूने दाम बिकत है दारू।
और बिधायक मिल रये सस्ते।।
घर में बंद डरे मजूर।
छोटे बेपारी भए मजबूर।।
कलाकार की कार बिग गई।
दो पईसा खाँ फिरत तरसते।।
करजा में गए डूब किसान।
बरसत ना बादर भगबान।।
जो नेता बादे कर रए ते।
दूरई सें अब करत नमस्ते।।
रैली आप करत श्रीमान।
हम निकरे सो भओ चालान।।
"रज्जू" जौ कानून अनोखौ।
जी में केबल निर्धन फसते।।
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✒️ रज्जू राजा
(बुंदेली लोककलाकार, डायरेक्टर - गुंजन एनजीओ)
नौगांओं छतरपुर, बुंदेलखंड
(भासा : किसानी - बुंदेली, रचना - रूप : गजल)
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