Sunday, July 26, 2020

जैति जैन 'नूतन' की कबिता - करिया सांप







पिरसंग - एक खेत में काम कर रए, बुंदेलखंड के गाँओं के किसान दम्पती और  एक करिया सांप (बाबा) आ जातई, जब का होत...

तनक देर भी ठांढ़ी नई रई
गदबद दौड़ लगा दई
जैसई देखो उने करिया सांप
सो मोय छोर के चल दई 

मौ कै रओ तनक रुक तौ जा
बा काय सुनबे पे आ रई
जैसई देखो उने करिया सांप
गदबद दौड़ लगा दई 

वैसे तो दुखत्ते घूंटा ऊँ के
तनक तनक में लौटत्ति
आयी मरबे कि बारी सो
मोय छोड़ के भग दई 

मैं तो खड़ो ऊके सामने सो
मोय डर नइयां का मरवे को
अपन खड़ी थी दो फुटा दूर
सो गदबद दौड़ लगा दई 

मिलन दो घरे, देखत ऊको
अपनी जान बचा लई
अब कैन दो घूटन की
सो मौ में आग लगा दई


✍🏻 जैती जैन 'नूतन'
     रानीपुर, झाँसी
(बुंदेली और हिंदी लेखका)
 भासा : बुंदेली
 रचना - रूप : कबिता
लेखका की बेबसाइट : https://jaytijain.wordpress.com



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