लिख तैं लिख,
सबकी सच्चाई लिख।
सच लिखबे में डरिए मत,
असली बकबे में झिझकिए मत।
बेईमान तोय दबाएँगे,
तैं हरहाल में दबिऐ मत।
मौत सें कभऊँ डरिए मत,
काय मौत के बादइँ,
फिर सें जनम मिलत हैगो।
ईसें यी जनम तैं डर गओ,
तो खुदखों भी माफ नहीँ कर सकेगो।
लिख तैं लिख,
सबकी सच्चाई लिख………….
✍🏻 सतेंद सिंघ किसान
जरबो गांओं, झाँसी
(किसानी और हिंदी लेखक)
भासा : किसानी
रचना - रूप : कबिता
रचनाकाल : १५ जनबरी २०१९
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