Saturday, August 29, 2020

बेबी सिंघ की कबिता - बैधित

 

              


   " बैधित "


इक चुप्पी इताएँ एक चुप्पी उताएँ

कभऊं मुकदर्सक देखकें हौले सें मुसकियातई

मुसकुराहटन मैं बैधित दर्द खों

मैं समजकें चुप रेऊतई

कभऊं अंतरमन सें

धन्यबाद अदा करतई


पर ओंठन पे आकेँ

चुप्पीयई ठेहेर जाऊतई

तुमाए लानें अखंड

सिरद्धा होत भए भी

मताई का बा तुमाए

नीरें ना जाऊतई


हिरदय में उठत हैंगीं हिलोरें

कभऊं तोड़ें यी चुप्पी खों

जाकें तुमाई ओली में

चिपककेँ फिर बई

बचपन की यादन में खो जाऊं

जितै मोय हिरदय की बातन खों

तैं बिना बोलेंईं समज जाऊतई


पर टैम के करौंटा के संगे

दोईयन के बीच

जा कैसी चुप्पी करत हैंगीं बातें...।


©️ बेबी सिंघ

गोमोह - धनबाद, झारखंड

(लिखनारी, कबयत्तरी और ग्रहनी)

हिंदी सीर्सक : व्यधित

हिंदी सें बुंदेली अनुबाद : सतेंद सिंघ किसान


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Thursday, July 30, 2020

प्रेरना मिसरा की कबिता

 


     " बनारस "

अपनेई रंग्ग में रंगों,
रहीसी ठाट-बाट कै संगे,
भोलोभालो और मौजमस्ती में हैगो पूरौ,
घाट - घाट पे गमछो पैंरें घूमें,
घूमत- फिरत हर मौडा लैकें हांत में गठजज्जा,
बेफिकर होकें हर रातै।


यी गेलन की जा खास बात,
ना पूछ इतै तैं जात - बिरादरी,
खाबेपीबे के सौकिया जे,
बैठ ढियांडें घाट सअर के,
करत जे देहात की बात।


केदार की पढ़कें कबिता बनारस,
मन में आई इक सौगात,
ना जानें कितैक खुबसूरत होयगौ,
बनारस कौ बो पाबन घाट,
मेला - ठेला सैर - सपाटो,
घुमंतुअन कै मनोरंजन कौ है राज,
बैठ ढियांडें घाट पे,
देखें सुंदरता की धार,
अबे हैगी सिरफ जई इक आस।

✒️ प्रेरना मिसरा
       नोएडा
(छात्तरा : दिल्ली बिस्ओबिद्यालय और हिंदी लेखका)
हिंदी सें किसानी - बुंदेली अनुबाद : सतेंद सिंघ किसान


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महेस कटारे 'सुगम' कौ कोरोना पे बुंदेली सॉनेट - २


 कोरोना सें कठन लड़ाई हम लड़ रय हैं 
बांध मुसीका मों पै अब हम निकरे घर सें
 हिम्मत लई है बांध निकर कें ई के डर सें 
ताल ठोक कें बड़े जतन सें हम बढ़ रये हैं 
कछु दिनन खों मिलवौ जुरवौ छोड़ौ हमनें 
गरे लगावे हाथ मिलावे  सें बच रये हैं 
ई सें बचवे सबई सावधानी रच रये हैं 
दूरई रै रये खुद खों खूब सिकोड़ौ हमनें
बीमारी सें बोलौ कैसें हार मान लें
 बिना काम के कैसें चल है रोटी पानी
 डरा डरा कें तौ हो जैहै खतम कहानी 
लतया लतया मार डार हैं अगर ठान लें 
निकर परे हैं अब हम पूरी तैयारी सें
जीतेंगे हम जीतेंगे ई बीमारी सें


✒️ महेस कटारे 'सुगम'
 बीना, सागर - बुंदेलखंड
 (बुंदेली और हिंदी गजलकार)
 भासा - बुंदेली
 रचना रूप - सॉनेट


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नई सिक्छा नीती - २०२० लागू : छेत्तीय भासन में चलाए जें ई-पाठ्यक्रम....








कल्ल, २९ जून २०२० को भारत सिरकार नें नई सिक्छा नीती लागू कर दई, जीसें देस की सिक्छा - बिबस्ता में केऊ बदलाओ देखबे मिलहैं। अबसें मानओ संसादन बिकास मंतरालय खों सिक्छा मंतरालय कओ जे।

 केंदीय मानओ संसादन बिकास मंतरी रमेस पोखरियाल निसंक और सूचना पिरसारन मंतरी प्रकास जाबडेकर नें बुद्द उआर खों प्रेस - मीटिंग कर ईकी जानकारी दई।

यीसें पैलें सन १९८६ में सिक्छा नीती लागू करी गई ती।  सन १९९२ में यी नीती में कछू संसोदन करे गए ते। यानी ३४ साल बाद देस में एक नई सिक्छा नीती लागू करी जा रई।

इसरो कै पूर्ब मुखिया कस्तूरीरंगन की अध्यकच्छता में बिसेसग्यन की एक कमेटी नें ईकी रूपरेखा तज्जार करी। जिए प्रधानमंतरी नरेंद मोदी की अध्यकच्छता में कैबिनेट ने मंजूरी दई।

नई में सिक्छा नीती में इसकूली सिक्छा सें लेकें डिग्री लौक केऊ बड़े बदलाओ करे गए।


नई सिक्छा नीती - २०२० की मुख्य बातें ई तरा हैं -:

नई सिक्छा नीती के हिसाब सें पिराथमक सिक्छा यानी 
कक्छा पाँच लौक मातभासा, इसतानीय और  छेत्तीय भासा  पढ़ाई - लिखाई कराई जे। इए कक्छा आठ या ऊसें आगें  भी बढ़ाओ जा सकत।

बिदेसी भासन की पढ़ाई जूनियर सें होय। हालांकि नई सिक्छा नीती में जा बात भी कई गई के कोनऊँ भी भासा खों थोपो नईं जाएगो।

सिक्छा कौ अधकार कानून (आर०टी०ई०) खों कक्छा बारा
लौक या १८ साल की उमर लौक लागू करो जे। मिडडे मील के संगे अब सें हैल्दी नास्ता भी पाठसालन में दओ जे।

तिभासा आधारित इसकूली सिक्छा रै और देहाती इलाकन में स्टाफ कोआटर बनाए जें केबी इसकूलन की तर्ज पे।

इसकूलन में राजनीत और सिरकार कौ हस्तछेप तकरीबन खतम करो जे और एनसीआरटी (NCERT) पूरे देस में नोडल एजेंसी होए।

साल २०३० लौक इसकूली सिक्छा में १००% जीईआर (Gross Enrolment Ratio) के संगे माध्यमक इसतर लौक 'सबके लानें सिक्छा' (एजुकेशन फ़ॉर ऑल) कौ लच्छ रक्खो गओ।

अबै पाठसालन सें दूर रै रए दो करोर बालीबच्चन खों फिर सें  मुख्यधारा में लाओ जे। ईके लानें पाठसाला के बुनियादी ढांचे कौ बिकास और नए सिक्छा केंद बनाए जें।
 
इसकूली पाठ्यक्रम के १० + २ ढांचे की जगह ५ + ३ + ३ + ४ कौ नओ पाठयक्रम लागू करो जे। ईमें अब लौक दूर रक्खे गए ३ सें ६ साल के बालीबच्चन खों इसकूली पाठ्यक्रम के तहत लाबे कौ पिराओधान करो है। जिए दुनियाई इसतर पे बालीबच्चन के मानसिक बिकास के लानें  जरूरी मानो जा रओ।

इसकूलन में सैकच्छिक गतबिधियंन, पाठ्येतर गतबिधियंन
और बेबसाइक सिक्छा के बीच खास अंतर नईं करो जे।

जीडीपी का छै फीसदी बजट सिक्छा में खर्च करबे कौ लच्छ रक्खो गओ, जौन अबे ४.४३ फीसदी हैगो।

नई सिक्छा कौ लच्छ सन २०३० लौक तीन सें अठारा (३ - १८) आयु बर्ग के हर बालीबच्चा खों  कुआलटीबाई (गुनबत्तापूर्न) सिक्छा दई जे।

नई सिक्छा नीती में सिर्फ बीएड इंटर के बाद ४ सालिया, इसनातक के बाद २ सालिया और परइसनातक के बाद १ सालिय बीएड कोर्स होयगो।

ऊँची सिक्छा के लानें एक सिंगल रेगुलेटर रै  (कानून और मेडिकल खों छोडकें)। मतलब अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दए जें और पूरी ऊँची सिक्छा (हाइयर एजूकेसन) के लानें एक नेसनल हाइयर एजूकेसन रेगुलेटरी अथोरिटी कौ गठन करो जे।


पैली बेर मल्टीपल इंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू करो गओ है। आपऔरें इए ऐसें समज सकतई। आज की बिबस्ता में अगर चार साल इंजीनरी पढ़बे या छै सेमेस्टर पढ़बे के बाद कोनऊँ कारन सें आगे नईं पढ़ पात हैं, तो आपके पास कोनऊँ उपाओ नईं होत, लेकन मल्टीपल इंट्री और एग्जिट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जेहै। ईसें उन छात्त - छात्तरन खों भौत फायदा होए, जिनकी पढ़ाई बीच में कोनऊँ बजै सें छूट जात हैगी।

 ऊँची सिक्छा में केऊ बदलाओ करे गए हैं। जो छात्त - छात्तरा खोज (रिसर्च) करबो चाऊत हैं, बिनके लाजें चार साल की डिग्री होए और जो लोग नौकरी में जाबो चाऊत हैं, बे तीन साल की डिग्री कर सकतई।  लेकन जो रिसर्च में जाबो चाऊत, बे एक साल के एम०ए० (MA) के संगे चार साल की डिग्री के बाद सीधे पी०एच०डी० (PhD) कर सकतई। उनें एम०फिल० (M.Phil) की ज़रूरत नईं हुज्जे।


खोज / सोद करबे के काजे नेसनल रिसर्च फाउंडेसन (एनआरएफ) की इसतापना करी जे। एनआरएफ (NRF) का मुख्य उद्देस्य बिस्ओबिद्यालयन के माध्यम सें सोद की रफ्तार खों बढ़ाबा देबो है। एनआरफ सुतंत (फ्रीली) रूप सें सिरकार दुआरां गठित एक बोर्ड ऑफ गबर्नर्स दुआरां
सासित होए।


ई-पाठ्यक्रम (ऑनलाइन कोर्स) छेत्तीय भासन में बिकसित करे जें। बर्चुअल लैब बिकसित की जा रईं हैंगीं और एक देसीय/रास्ट्रीय सैकच्छिक टेक्नोलोजी फोरम (NETF) बनाओ जा रओ।

         अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात नई सिक्छा नीती की ई बात सें खुस है के प्राइमरी पाठसालन में सिक्छा मातभासा में दई जे। #बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन के दुआरां हम अखंड बुंदेलखंड में आंगनबाड़ी सें लेकें डिग्री और सोद इसतर (हाइयर एजूकेसन) लौक बुंदेली भासा की सिक्छा और बुंदेली माध्यम (मीडियम) में सिक्छा कौ नियम बनाबो चाऊत। हमें पूरौ भरोसो है के हमाए बुंदेलखंडी संगीसाथी   अखंड बुंदेलखंड के बिकास के लानें लड़ी जा रई यी लड़ाई में जरूर जीतें। जै जै बुंदेलखंड!


✒️ सतेंद सिंघ किसान
   जरबो गांओं, झाँसी
(संसतापक : बुंदेली बुंदेलखंड आंदोलन)
   ३०/७/२०२०

Wednesday, July 29, 2020

कोरोना पे बुंदेली ख्याल गीत....







गायक : जागे पाल, न्यूलीबाँसा 

बीडिओ साभार :  सुनील राजपूत, हमीरपुर





Tuesday, July 28, 2020

सतेंद सिंघ किसान की किसानबादी कबिता – किसान की आबाज









तुम औरें मारत रए भैंकर मार
और मार रए अबै भी
धीरें – धीरें सें
धरम, जात, करजा और कुरीतयंन मेँ बाँधकें
अन्धविश्वास, जुमले और बेअर्थ कानून बनाकें
पढ़ाई – लिखाई सें बंचित करकें
लूटत रए हमें

पर
अब हम जग गए हैं
अपन करम की कीमत पैचान गए हैं
अब सें हम अपन फसल कै दाम खुद तै करहैंगे
अपन मैनत कौ पूरो फल चखहैंगे

तुम भी हमाए करम की कीमत पैचानो
भूँख मिटाबे बायन कौ संग दो
नईं तो तुम भी मारे जाओगे
जल्दीं
हम किसानन की परिबर्तनबादी क्रान्ति में
सिर्फ बचेंगे अन्न उगाबेबाय
और बदलाओकारी जन…


✒️ सतेंद सिंघ किसान
   जरबो गांओं, झाँसी
(किसानी और हिंदी लेखक)
 भासा : किसानी
  रचना - रूप : कबिता
 रचनाकाल : ४/१२/२०१९_११:५० रात

#बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन



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महेस कटारे 'सुगम' कौ बुंदेली सॉनेट





ई जीवन की दुख तकलीफें काँ तक सैवें
 जोंन आज कौ वौइ काल कौ रोवौ धोवौ
 रातें बेइ खरारी खटिया जग कें सोवौ
अपने मन की खदकत बातें की सें कैवें 
सोचत हैं हर साल कर्ज सें पीछौ छूटै 
मेंनत करत लगावें लग्गत खून सुकावें
 करें किसानी पानी देवें और रखावें 
कभऊँ परत हैं औरे फिर कऊँ बादर रूठै 
फसल कभऊँ नें साबत आवै टोटौ परवै
सपनन की धूरा बँट जावै देखत देखत 
उमर चली गई मन के फौला सेंकत सेंकत
गुस्सा आवै परमेसुर खों उठा पटकवै 
कत हैं मनौ मिलत नंईयाँ राहत सरकारी 
है किसान की सांसऊँ हर सत्ता हत्यारी 

✒️ महेस कटारे 'सुगम'
   बीना, सागर - बुंदेलखंड
 (बुंदेली और हिंदी गजलकार)
 भासा - बुंदेली
 रचना रूप - सॉनेट

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#बुंदेलीसिनेमाकौइतहास




#बुंदेलीसिनेमाकौइतहास

हैजटैगबुंदेलीसिनेमाकौइतहास में हम आप लौक पौंचाएंगे बुंदेली सिनेमा - बुन्देलीबुड सें सम्बन्धित तमाम तथ्य....

हैजटैगबुंदेलीसिनेमाकौइतहास के तहत हम संचार के बिभिन्न माध्यम जैसे -  टीबी, रेडिओ, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टुइटर आदि पर अब पिरसारित बुंदेली सिनेमा सम्बन्धित सामग्री जैसे -  फिलमें, नाटक, गाना, समीक्छाएँ और लेख आदि पिरकासित करेंगे ताकि बुंदेली सिनेमा की सारी सामग्री एक जगा संरक्छित हो सके और बुंदेली सिनेमा कौ इतहास लिखो जा सके।

           आपकौ अपनो -:
        सतेंद सिंघ किसान
(संस्तापक - अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात)
      २८ जुलाई २०२०, झाँसी


#बुंदेलीबुंदेलखंडआंदोलन

Sunday, July 26, 2020

जैति जैन 'नूतन' की कबिता - करिया सांप







पिरसंग - एक खेत में काम कर रए, बुंदेलखंड के गाँओं के किसान दम्पती और  एक करिया सांप (बाबा) आ जातई, जब का होत...

तनक देर भी ठांढ़ी नई रई
गदबद दौड़ लगा दई
जैसई देखो उने करिया सांप
सो मोय छोर के चल दई 

मौ कै रओ तनक रुक तौ जा
बा काय सुनबे पे आ रई
जैसई देखो उने करिया सांप
गदबद दौड़ लगा दई 

वैसे तो दुखत्ते घूंटा ऊँ के
तनक तनक में लौटत्ति
आयी मरबे कि बारी सो
मोय छोड़ के भग दई 

मैं तो खड़ो ऊके सामने सो
मोय डर नइयां का मरवे को
अपन खड़ी थी दो फुटा दूर
सो गदबद दौड़ लगा दई 

मिलन दो घरे, देखत ऊको
अपनी जान बचा लई
अब कैन दो घूटन की
सो मौ में आग लगा दई


✍🏻 जैती जैन 'नूतन'
     रानीपुर, झाँसी
(बुंदेली और हिंदी लेखका)
 भासा : बुंदेली
 रचना - रूप : कबिता
लेखका की बेबसाइट : https://jaytijain.wordpress.com



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Saturday, July 25, 2020

बुंदेली रैपर एसबन पीबन टीम कौ रैप गाना - बुलाती है पर जाने का नईं...

https://youtu.be/EovPSn6Uj_s





बीडिओ साभार : एसबन पीबन यूटूब चैनल



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सतेंद सिंघ किसान की कबिता - लिख तैं लिख...







लिख तैं लिख,
सबकी सच्चाई लिख।
सच लिखबे में डरिए मत,
असली बकबे में झिझकिए मत।
बेईमान तोय दबाएँगे,
तैं हरहाल में दबिऐ मत।
मौत सें कभऊँ डरिए मत,
काय मौत के बादइँ,
फिर सें जनम मिलत हैगो।
ईसें यी जनम तैं डर गओ,
तो खुदखों भी माफ नहीँ कर सकेगो।
लिख तैं लिख,
सबकी सच्चाई लिख………….

✍🏻 सतेंद सिंघ किसान
     जरबो गांओं, झाँसी
(किसानी और हिंदी लेखक)
 भासा : किसानी
  रचना - रूप : कबिता
  रचनाकाल : १५ जनबरी २०१९



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महेस कटारे 'सुगम' कीं पाँच गजलें

        



         (१.)

जे जाबें और बे आ जाबें का होंनें है
इनें हराबें उनें जिताबें का होंनें है

इनके बादे हबा हबाई सब हो गये
अब बे सपने हमें दिखाबें का होंनें है

जियत बाप खों पानी नईं दऔ सब जानत
मरे हाड़ गंगा लै जाबें का होंनें है

पथरन पै जल ढार ढार पथरा हो गये
सपरें खोरें,तिलक लगावें का होंनें है

हिन्दू और मुसलमानन की का कैनें
मंदर जाबें, मस्जिद जाबें का होंनें है

 
              (२.)

अपनौ मौ तौ खोलौ भौजी
अरे कछू तौ बोलौ भौजी

दुनिया खों कुतका पै धर दो
इज्जत सें तुम डोलौ भौजी

सब के सब हैं खीस निपोरा
छोटौ,बड़ौ,मँझोलौ भौजी

जोंन दिखा रऔ हट्टौ,कट्टौ
है भीतर सें पोलौ भौजी

जी के मन में दया रहम है
ऊ के संगै हो लो भौजी

बातन खों कैवे के पैलें
सुगम मनई मन तौलौ भौजी

(कुतका...... ठेंगा।खीस निपोरा.... दाँत दिखाने वाले)


              (३.)

जाबे खों कितऊँ तरसें तुम कऔ तौ मोरी गुँईयाँ
हम कैसें कढ़ें घर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

जुल्फन में तेल डारें बैठे गली में गुंडा
आबै फरूरी डर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

ऐसें लगत है जैसें सब छुट्टा साँड़ हो गये
बोये गये का हर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

मौड़ा बड़े घरन के,ऊपर सें हैं उचक्का
को बीद रऔ जबर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

जानें हतौ फरागत जे हैं कै टरत नँईयाँ
बैठे हम दुफर सें तुम कओ तौ मोरी गुँईयाँ

(कढ़ें....निकलें ।हर...हल ।बीदना......उलझना ।फरागत.... शौच। दुफर.... दोपहर)


              (४.)

मिला मिला कें पानी पी गये
सबरे खेत, किसानी पी गये

हड्डा अब हिलगे रै गये है
अपनी भरी ज्वानी पी गये

खुद नें तो जोरी नईं कच्छू
दौलत हती पुरानी पी गये

घर तौ घर बाहर तक चोरी
मुतकन की निगरानी पी गये

अब तौ बस खाँसत फिर रये हैं
जीवन की आसानी पी गये

(हिलगे......लटके ।मुतकन....बहुत सारे ।)



            (५.)

खोदी खाई गैरा दई है
नाक में कौंड़ी पैरा दई है

सजधज कें बरात निकरी ती
बीच घाम में ठैरा दई है

जोते,बखरे खेत डरे ते
भाँग सबई में ऐरा दई है

अफरन खों ब्यारू करवा रये
नियत लोभ नें भैरा दई है

नियम करम सब उल्टे कर दये
नद्दी नाँओं में तैरा दई है

बे हैं सबसे बड़े घोल्लाँ
धुजा धरम की फैरा दई है

(गैरा.... गहराना। नाक में कौड़ी पैराना......परेशान करना।
घाम... धूप ।ऐराना......बोना ।अफरन......भरे पेट वाले।
भैराना......लार टपकाना ।घोल्ला.....पीर ।धुजा... ध्वजा।)


✒️ महेस कटारे 'सुगम'
     बीना, सागर - बुंदेलखंड
  (बुंदेली और हिंदी गजलकार)
      भासा - बुंदेली
     रचना रूप - गजल


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Friday, July 24, 2020

बुंदेलखंडियन के लानें अखंड बुंदेलखंड काय नईं?




जब तेलगू भासियन के लानें आंध्रा और तेलंगाना राज्ज
तमिलन के लानें तमिलनाडु
मराठियन के लानें महारास्ट्र
गुजरातियन के लानें गुजरात
बंगालियन के लानें बंगाल
तो बुंदेलखंडियन के लानें अखंड बुंदेलखंड काय नईं?
बुंदेली भासियन के लानें अखंड बुंदेलखंड राज्ज 
बनें चज्जे और उते की राजभासा बुंदेली-किसानी...।

✒️ सतेंद सिंघ किसान 
   (संस्तापक : बुंदेली - बुंदेलखंड आंदोलन)
      २४ जुलाई २०२०, झाँसी


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